गाँव में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण और जिम्मेदार कौन?
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| 228 गाँव, अधूरी रोशनी: अबूझमाड़ में बिजली संकट के कारण और जवाबदेही? |
जब देश चाँद की बात करता है, तब अबूझमाड़ आज भी अंधेरे में जी रहा है
228 गाँव, अधूरी रोशनी: अबूझमाड़ में बिजली संकट के कारण और जवाबदेही
बिजली विभाग की भूमिका
सबसे बड़ी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होती है। कई बार लाइन की मरम्मत समय पर न होना, पुराने और कमजोर तारों तथा ट्रांसफॉर्मर को बदलने में देरी, और फॉल्ट की स्थिति में धीमी कार्रवाई जैसी लापरवाहियां इस समस्या को जन्म देती हैं। ग्रामीण इलाकों पर कम ध्यान देना भी विभाग की एक बड़ी कमी है। उदाहरण के तौर पर छत्तीसगढ़ के अबुजमाड़ इलाके में बिजली तो लगभग सभी घरों में पहुंचती है, लेकिन जलती नहीं, क्योंकि विभाग समय पर मरम्मत नहीं करता या कर्मचारी नक्सुसल प्रभावित इलाके में सुरक्षा संबंधी कारणों से वहां जाने से कतराते हैं।
सेवा व्यवस्था में खामियां
बिना सूचना के बिजली काट देना, शिकायतों का सही समाधान न मिलना और कर्मचारियों की कमी जैसी व्यवस्थागत कमजोरियां भी इस समस्या को बढ़ावा देती हैं। ये सभी बातें बिजली विभाग और उसके सिस्टम की विफलता को दर्शाती हैं।
स्थानीय लोगों की गलतियां
कई बार बिजली चोरी, अवैध कनेक्शन लेना और ओवरलोड मशीनों का उपयोग करने जैसी गलत हरकतें पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति को प्रभावित करती हैं। ये गतिविधियां न केवल विभाग के काम में बाधा डालती हैं, बल्कि पूरे नेटवर्क को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए स्थानीय लोगों की भी इस मामले में आंशिक जिम्मेदारी होती है।
प्रशासन की भूमिका
प्रशासन की निगरानी में यदि कमी रहती है और नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया जाता, तो समस्या और गहराती है। प्रशासन की यह कमजोरी बिजली आपूर्ति में व्यवधान का एक और कारण बनती है।
निष्कर्ष
गाँवों में बिजली कटौती की समस्या के लिए केवल किसी एक पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। बिजली विभाग मुख्य रूप से जिम्मेदार है, किन्तु स्थानीय लोग और प्रशासन भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में दोषी हैं। यदि ये तीनों ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने कार्यों का पालन करें, तो गाँवों में बिजली की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
